Posts

Showing posts from October, 2024

श्री गोवर्धन जी की पूजा की कथा

Image
श्री गोवर्धन जी की पूजा की कथा क्या आप श्री गोवर्धन जी की  पूजा की अद्भुत कथा के बारे में जानते हैं? तो आइये आज जानते हैं  कैसे भगवान श्री कृष्ण जी ने श्री गोवर्धन पर्वत की रक्षा की और इसके पीछे की प्रेरक कहानी! श्री गोवर्धन जी की पूजा की कथा दिवाली के बाद पूरे देश में श्री गोवर्धन जी की पूजा बड़ी ही श्रद्धापूर्वक एवं धूम धाम से मनाई जाती है। यह त्यौंहार काफी ख़ास है, क्योंकि इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण जी से है। आइये इस कथा के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि इस पर्व की शुरूआत कैसे हुई और इसका भगवान श्रीकृष्ण जी से इसका क्या संबंध है ? द्वापर युग में एक बार देवराज श्री इंद्र देव जी को अपनी शक्तियों के ऊपर काफ़ी अहंकार हो गया था। उनका यह अभिमान तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण जी ने बड़ी ही अद्भुत लीला रची थी। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण जी ने देखा कि ग्रामवासी किसी पूजा की तैयारी में व्यस्त हैं और स्वादिष्ट पकवान बना रहे हैं। यह देखकर भगवान श्रीकृष्ण मैया यशोदा जी से पूछते हैं कि, माँ यहां सब लोग किसकी पूजा की तैयारियों में व्यस्त हैं? भगवान श्रीकृष्ण जी की...

नरक चतुर्दशी क्यों मनायी जाती है ?

Image
नरक चतुर्दशी क्यों मनायी जाती है ? नरकासुर पर भगवान श्री कृष्ण जी की विजय का स्मरणोत्सव नरक नचतुर्दशी (जिसे काली चौदस , नरक चौदस , रूप चौदस , छोटी दिवाली , नरक निवारण चतुर्दशी और भूत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है ) । यह भारतीय सनातन हिन्दू धर्म और संस्कार और संस्कृति का एक वार्षिक हिंदू त्यौंहार है जो हिंदू कैलेंडर के अश्विन ( अमंता परंपरा के अनुसार ) या कार्तिक ( पूर्णिमांत परंपरा के अनुसार ) माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (१४वें दिन) को पड़ता है।  यह दिवाली ( छोटी दिवली के नाम से भी जाना जाता है ) के पांच दिवसीय त्यौंहार का दूसरा दिन है । हिंदू साहित्य में वर्णन है कि असुर (राक्षस) नरकासुर (शाब्दिक रूप से "नरक से राक्षस") को इस दिन कृष्ण और सत्यभामा ने मार दिया था । यह दिन सुबह-सुबह धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है । नरक चतुर्दशी भगवान श्री कृ...

आखिर क्यों मनाया जाता है दिवाली का त्यौंहार ? जानें इसके पीछे का पौराणिक महत्व ।

Image
आखिर क्यों मनाया जाता है दिवाली का त्यौंहार ? जानें इसके पीछे का पौराणिक महत्व  हर साल दिवाली का त्यौंहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है ।  इस बार दिवाली 2024 को 31 अक्टूबर को मनायी जा रही है। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी जी और भगवान गणेश जी की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है । लेकिन भारतीय सनातन धर्म संस्कार और संस्कृति में दिवाली को मनाने के पीछे क्या कारण है, आइए जानते हैं ।   भारतीय सनातन धर्म संस्कार और संस्कृति में दिवाली सबसे महत्वपूर्ण त्यौंहार माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी जी और भगवान गणेश जी की पूजा का विधान है।  भारतीय सनातनी हिन्दू धर्म के लोग दिवाली के दिन मां लक्ष्मी जी एवं भगवान गणेश जी की पूजा करते हैं । कहा जाता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी जी इस दिन सबके घर में प्रवेश करती हैं जहाँ परिवार में प्रेम -भाव, मान- सम्मान और एक दूसरे के प्रति श्रद्वा होती है ऐसे घर में माँ लक्ष्मी जी अपना स्थाई निवास कर लेती हैं । जिस घर में कलह रहती है, परिवार में प्रेम भाव और एक दूसरे के प्रति मान सम्मान और श्रद्धा भाव नहीं...

धनतेरस कब और क्यों मनाया जाता है ?

Image
धनतेरस कब और क्यों मनाया जाता है ?  दीपावली की रात भगवान श्री गणेश जी व देवी लक्ष्मी जी के लिए भोग चढ़ाया जाता है।  भारतीय सनातन शास्त्रों में बताया गया है कि समुद्र मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि जी और माँ लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था । यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वन्तरि जी  और माँ लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है । धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है। धनतेरस कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि जी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर जी इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध ...

शरीर के लिए क्यों जरूरी है ओमेगा -3

Image
मानव शरीर के स्वस्थ एवं तंदूरूस्ती के लिए ओमेगा 3 सबसे जरूर फैटी एसिड है । यह ह्यूमन बॉडी के लिए जरूरी इसलिए है क्योंकि इसका उत्पादन करने में हमारा शरीर सक्षम नहीं है जिसके कारण इनकी भरपाई प्लांट और एनिमल बेस्ड फूड से करनी पड़ती है । ओमेगा 3 के अलग-अलग प्रकार हैं - एएलए (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड), डीएचए (डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड), और ईपीए (ईकोसापेंटेनोइक एसिड). डीएचए और ईपीए का सोर्स समुद्री भोजन है, जबकि एएलए आमतौर पर प्लांट बेस्ड फूड में पाया जाता है जिसमें नटस और बीज शामिल हैं ।  इसीलिए डॉक्टर कहते हैं कि आपको अपने डेली डाइट में नट्स को शामिल करना चाहिए । नाश्ते में अनाज और दूध के साथ नट्स खाने से कुछ हद तक ओमेगा 3 की आपकी डेली डोज की भरपाई हो जाती है । मछली से भी ज्यादा अच्छी और ज्यादा ओमेगा -3 पाये जाने वाली ये 5 देसी चीजें, शरीर को देंगी पूरा ओमेगा-3, एक-एक अंग बनेगा मजबूत मानव शरीर में ओमेगा-3 की कमी से आपको थकान, याददाश्त कमजोर होना, ड्राई स्किन, दिल के रोग, मूड स्विंग, तनाव, ब्लड सर्कुलेशन का बिगड़ना जैसे गंभीर लक्षण महसूस हो सकते हैं। बेवजह कुछ विधर्मी और अज्ञानी ल...

केले के साथ आप अनजाने में खा रहे हैं कैंसर

Image
केला यानी कैंसर का कारक   भिन्न भिन्न विषयों पर ब्लॉग लिखना मेरी रुचि,आदत और शौक है। आज मैं केले पर ब्लॉग लिखने जा रहा हूँ। केला वैसे तो प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ,पौष्ठिक और पवित्र फल माना जाता है । लेकिन केले का व्यवसाय करने वाले कुछ लालची,अमानवीय, असुर और राक्षस किस्म के बेगैरत लोगों ने इसे कैंसर का सबसे बड़ा कारक बना दिया है। वैसे केला  प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ फल है तो फिर ये कैंसर का कारक कैसे बन जाता है ? प्रकृति के अमृत और पौष्ठिक फल केले को आखिर जहर कैसे बनाया जा रहा है, आज इसी की पूरी सच्चाई मेैं आपको इस ब्लॉग में बताने जा रहा हूँ ।               आज मैं आपको केले का व्यवसाय करने वाले कुछ लालची और बैगैरत लोगों का यह बड़ा षड़यंत्र और धोखा बताने जा रहा हूँ। सावधान हो जाइये अगर आप भी केला खाने के शौकिन है । यदि आप भी कई सालों से केला खाते हैं, और आपको साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी है ! पेट में और सिर में दर्द रहने लगा है! चक्कर आने लगे हैं! न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो रही हैं तो यह बाज़ार में मिलने वाले...

गायों को स्वस्थ रखने एवं दूध बढाने का देशी फार्मूला

Image
गाय को स्वस्थ रखने और दूध बढ़ाने का एक अकेला फार्मूला, जिससे उसका लीवर, पाचन क्रिया, दूध में बढ़ोतरी, डिवर्मिंग और अन्य  छोटी बड़ी कई बीमारियां दूर हो जाती है । थोड़ी सी मेहनत और थोड़ी सी देखभाल के साथ, आप गौ माता को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रख सकते हैं । इसका एक देशी और प्राकृतिक फार्मूला है जो इस प्रकार है ।  गड़ तुम्बा  समुद्री नमक  काला नमक  सैंधा नमक इस फार्मूले लिए सामग्री- 1- 10 किलो गड़तुंबा लेना है, उसमें 2- 1 किलो समुद्री नमक, 3-  1 किलो सेंधा नमक, 4- 1 किलो काला नमक, 5- 1 किलो हल्दी, 6-  1 किलो सौंफ, 7- दो किलो छाछः 8- 1 किलो सूखा बाड़ करेला, 9-  1 सूखे नारियल का चूरा 10- 1 किलो पीपल के सूखे पत्ते 11- 1 किलो बरगद के सूखे पत्ते 12- 500 ग्राम बड के सूखे फूल, 13- 500 ग्राम एलोवेरा का सूखा पाउडर 14- 500 ग्राम सहजन के सूखे पत्ते 15- 500 . गिलोय पाउडर विधि - एक बड़े मिटटी के मटके में गाडतुंबा के चार-चार हिस्से करके , सबको थोड़ा-थोड़ा कूट पीट कर मिला देना है. और उसे डेढ़ से...