धनतेरस कब और क्यों मनाया जाता है ?

धनतेरस कब और क्यों मनाया जाता है ? 

दीपावली की रात भगवान श्री गणेश जी व देवी लक्ष्मी जी के लिए भोग चढ़ाया जाता है। 

भारतीय सनातन शास्त्रों में बताया गया है कि समुद्र मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि जी और माँ लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था ।


यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वन्तरि जी  और माँ लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है । धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है।

धनतेरस

कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि जी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर जी इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रथा

धन्वन्तरि जी

धन्वन्तरि जी देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता हैं, इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। 

एकलोक कथा -
धनतेरस के सन्दर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज ने यमदूतों से पूछा कि प्राणियों को मृत्यु की गोद में सुलाते समय तुम्हारे मन में कभी दया का भाव नहीं आता क्या ? दूतों ने यमदेवता के भय से पहले तो कहा कि वह अपना कर्तव्य निभाते हैं और उनकी आज्ञा का पालन करते हैं परन्तु जब यमदेवता ने दूतों के मन का भय दूर कर दिया तो उन्होंने कहा कि एक बार राजा हेमा जी के पुत्र का प्राण लेते समय उसकी नवविवाहिता पत्नी का विलाप सुनकर हमारा हृदय भी पसीज गया था पर विधि के विधान के अनुसार हम चाह कर भी कुछ न कर सके।

एक दूत ने बातों ही बातों में तब यमराज से प्रश्न किया कि अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है क्या ? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यम देवता ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की संध्या यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की संध्या लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। इस दिन लोग यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।

धनतेरस के दिन दीप जलाकर भगवान धन्वन्तरि जी की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरि जी से स्वास्थ बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। चाँदी का कोई पात्र व लक्ष्मी जी व गणेश जी अंकित सोने-चाँदी का सिक्का भी रखा  जाता है। 



धनतेरस के दिन पूजा कैसे की जाती है?

इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पित करें। इसके बाद मंदिर की सफाई करें। चौकी पर भगवान धन्वन्तरि जी के संग मां लक्ष्मी जी और भगवान गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान करें। रोली या फिर चंदन का टीका लगाएं और फूल माला अर्पित करें।

धनतेरस पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

धनतेरस का त्यौंहार हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरी जी  और माता लक्ष्मी जी  के साथ धन के देवता कुबेर जी की पूजा का भी  विधान है।

 साथ ही, इस दिन 13 दीया जलाने का भी रिवाज है। 


प्रस्तुति -निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत, 8619666046
Email-chiranjikumawat54@gmail.com

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