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Showing posts from April, 2024

सहजन, सहनणा, मोरिंगा

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सहजन यानी की मोरिंगा अगर ताजा हो तो यकीन मानिए दुनिया की कोई भी तरकारी इसका मुकाबला नही कर सकती ........ कच्चा मसाला और गर्म मसाला का अंतर समझने वालो के लिए बता दूँ की हरी सब्जी को आप गर्म मसाले से जितना दूर रखेंगे उतना बेहतर होगा..... सहजन को धुल दीजिए फिर बाइट के स्लेब मे काट लीजिए और जिस तरह से ताजा कद्दू बनाया जाता है ठीक उसकी तरह पका लीजिए.... कोई मिलावट नही.......... आधा घंटा के भीतर तैयार है सबसे अधिक विटमिन वाली सब्जी..... और सूप तो और लाजवाब होता है बस सहजन एकदम गदाया हुआ होना चाहिए......!!!  इसमें दुध से 4 गुना कैल्शियम,  केले से 3 गुना पोटैशियम  संतरे से 7 गुना विटामिनc ,  गाजर से 4 गुना विटामिन A मिलता है।। प्रस्तुति -निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत, 8619666046 Email -chiranjikumawat54@gmail.com

गीतकार डॉ प्रभा ठाकुर जी

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राजस्थान की प्रथम महिला गीतकार, कवयित्री, समाज सेविका, राजनीतिज्ञ, और बहुमुखी प्रतिभा की धनी - प्रभा ठाकुर जी, मंच की मशहूर कवयित्री, समाज सेविका और राजनीतिज्ञ प्रभा ठाकुर जी को राजस्थान की प्रथम महिला गीतकार होने का गौरव हासिल है । सादा, सरल, मिलनसार प्रवृत्ति की बहु प्रतिभा की धनी है प्रभा ठाकुर जी । प्रभा ठाकुर जी का राजस्थानी भाषा और राजस्थानी फिल्मों में उनका किया गया नवाचार प्रशंसनीय और अनुकरणीय है । प्रभा ठाकुर जी ने फिल्म अलबेली 1974 से फिल्म कच्ची सड़क तक कुछ चुनिंदा फिल्मों को अपनी काव्य रचनाओं से सजाया है । प्यार करने से पहले जरूरी है फिल्म दुनियादारी, चलते चलते इन राहों में फिल्म आत्माराम, तोहफा कबूल है हमें  फिल्म घुंघरू, मोसे चटनी पिसावै फिल्म पापी पेट का सवाल है, म्हारी देराणी हठीली राजस्थानी फिल्म देराणी जेठाणी, थारो सुरज जेसो मुखड़ो राजस्थानी फिल्म बीनणी होवै तो इसी  जैसे कई गीत बहुत ही लोकप्रिय हुए हैं । सांसद और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्षा रही प्रभा ठाकुर जी  गीत लेखन के साथ ही राजस्थानी भाषा में एक साफ सुथरी और पारिवारिक फिल...

एक सुप्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री हिमानी भट्ट शिवपुरी जी

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हिमानी भट्ट शिवपुरी जी एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो हिंदी फिल्मों और हिंदी सोप ओपेरा में अपनी चरित्र भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं ।  वह हम आपके हैं कौन,   सहित कई फिल्मों में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती हैं ! (1994), राजा (1995), दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995), खामोशी (1996), हीरो नंबर 1 (1997), दीवाना मस्ताना (1997), बंधन (1998), और कुछ कुछ होता है (1998)। उन्होंने बीवी नंबर 1 (1999), हम साथ-साथ हैं (1999), कभी खुशी कभी गम... (2001) और मैं प्रेम की दीवानी हूं (2003) सहित कई अन्य फिल्मों में भी अभिनय किया है । व्यक्तिगत जीवन हिमानी भट्ट शिवपुरी जी का जन्म देहरादून , उत्तराखंड में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता, श्री हरिदत्त भट्ट जी शैलेश, एक हिंदी शिक्षक थे और माँ श्रीमती शैल भट्ट जी एक गृहिणी हैं। हिमानी भट्ट शिवपुरी जी का एक भाई है,  श्री हिमांशु भट्ट...

हिमानी भट शिवपुरी

हिमानी भट्ट शिवपुरी जी एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो हिंदी फिल्मों और हिंदी सोप ओपेरा में अपनी चरित्र भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं ।  वह हम आपके हैं कौन,   सहित कई फिल्मों में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती हैं ! (1994), राजा (1995), दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995), खामोशी (1996), हीरो नंबर 1 (1997), दीवाना मस्ताना (1997), बंधन (1998), और कुछ कुछ होता है (1998)। उन्होंने बीवी नंबर 1 (1999), हम साथ-साथ हैं (1999), कभी खुशी कभी गम... (2001) और मैं प्रेम की दीवानी हूं (2003) सहित कई अन्य फिल्मों में भी अभिनय किया है । व्यक्तिगत जीवन हिमानी भट्ट शिवपुरी जी का जन्म देहरादून , उत्तराखंड में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता, श्री हरिदत्त भट्ट जी शैलेश, एक हिंदी शिक्षक थे और माँ श्रीमती शैल भट्ट जी एक गृहिणी हैं। हिमानी भट्ट शिवपुरी जी का एक भाई है,  श्री हिमांशु भट्ट जी । उ...

दिल्ली की कुतुब मीनार

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विदेशी आक्रांताओं ने भारत में जो भी निर्माण करवाया वो यहाँ के मंदिर, गढ किले महलों को तोडकर ही करवाया था । 27 किला को तोड़कर बनायी गयी थी दिल्ली की कुतुब मीनार । कुतुब मीनार का निर्माण काल लगभग 1192 का है ये मीनार पास के 27 किला को तोड़कर और दिल्ली विजय के उपलक्ष्य में 27 किले की सामग्री और मलबे से बनायी गयी थी । दिल्ली के महरौली स्थित ये कुतुब मीनार विदेशी आक्रांता, लुटेरे, अत्याचारी, बलात्कारी, हरामी, कुतुबद्दीन ऐबक और उसके उत्तराधिकारी शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने 1200 ईस्वी में करवाया था । दिल्ली की कुतुब मीनार के कॉम्प्लेक्स में शम्सुद्दीन इल्तुतमिश का मकबरा मौजूद है, जिसे बेहद खूबसूरती से बनाया गया है। शम्सुद्दीन इल्तुतमिश कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी और दामाद था , जिन्हें गुलामों का गुलाम भी कहा जाता है ।  क्योंकि यह शम्सुदीन इल्तुतमिश, कुतुबुद्दीन ऐबक का गुलाम था । और कुतुबदीन ऐबक, आक्रांता, लुटेरे, अत्याचारी और हरामी महमूद गोरी का गुलाम था। इन विदेशी आक्रांताओं, लुटेरे, अत्याचारी और बलात्कारियों का इतिहास रहा है कि इन्होंने भारत जो सोने की चिड़िया थ...

विजु खोटे

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शोले के 'कालिया'... हरफनमौला अभिनेता श्री विजु खोटे, जी,जिन्हें नाम के बाद भी मांगना पड़ा था काम । श्री विजु खोटे जी का पूरा नाम विट्ठल बापुराव खोटे उर्फ विजु खोटे था । श्री विजू खोटे जी ने 'कुर्बानी' (1980), 'नसीब' (1981), 'मेरी जंग' (1985), 'कर्मा' (1986), 'नगीना' (1986), 'दादागिरी' (1987), 'कयामत से कयामत तक' (1988), 'तेजा' (1990), 'त्रिनेत्र' (1991), 'जय किशन' (1994), 'अंदाज अपना-अपना' (1994), 'लज्जा' (2001), 'तलाश' (2003), 'हल्ला बोल' (2008) और 'गोलमाल 3' (2010) जैसी शानदार फिल्मों में काम किया है।  श्री विजु खोटे जी का जन्म 17 दिसंबर 1941 को मुंबई में हुआ था। उनका जन्म का नाम विट्ठल बापुराव खोटे था। उन्होंने लगभग 300 से भी अधिक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया था। हालांकि, उन्हें 'शोले' फिल्म में कालिया के जबरदस्त किरदार के लिए जाना जाता है। श्री विजू खोटे जी का फिल्म 'अंदाज अपना अपना' का एक डायलॉग 'गलती से मिस्टेक हो ग...