गीतकार डॉ प्रभा ठाकुर जी

राजस्थान की प्रथम महिला गीतकार, कवयित्री, समाज सेविका, राजनीतिज्ञ, और बहुमुखी प्रतिभा की धनी - प्रभा ठाकुर जी,
मंच की मशहूर कवयित्री, समाज सेविका और राजनीतिज्ञ प्रभा ठाकुर जी को राजस्थान की प्रथम महिला गीतकार होने का गौरव हासिल है ।
सादा, सरल, मिलनसार प्रवृत्ति की बहु प्रतिभा की धनी है प्रभा ठाकुर जी ।
प्रभा ठाकुर जी का राजस्थानी भाषा और राजस्थानी फिल्मों में उनका किया गया नवाचार प्रशंसनीय और अनुकरणीय है ।
प्रभा ठाकुर जी ने फिल्म अलबेली 1974 से फिल्म कच्ची सड़क तक कुछ चुनिंदा फिल्मों को अपनी काव्य रचनाओं से सजाया है । प्यार करने से पहले जरूरी है फिल्म दुनियादारी, चलते चलते इन राहों में फिल्म आत्माराम, तोहफा कबूल है हमें  फिल्म घुंघरू, मोसे चटनी पिसावै फिल्म पापी पेट का सवाल है, म्हारी देराणी हठीली राजस्थानी फिल्म देराणी जेठाणी, थारो सुरज जेसो मुखड़ो राजस्थानी फिल्म बीनणी होवै तो इसी  जैसे कई गीत बहुत ही लोकप्रिय हुए हैं ।
सांसद और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्षा रही प्रभा ठाकुर जी  गीत लेखन के साथ ही राजस्थानी भाषा में एक साफ सुथरी और पारिवारिक फिल्म बीनणी होवै तो इसी और एक भक्ति प्रधान हिन्दी फिल्म जय महालक्ष्मी माँ का निर्माण, निर्देशन, गायन, और संगीत निर्देशन भी कर चुकी हैं ।
प्रभा ठाकुर जी का एक भारतीय राजनीतिज्ञ, कांग्रेस नेता, प्रसिद्ध हिंदी कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह 2004 से 2014 के दौरान राजस्थान से लगातार दो बार राज्यसभा सांसद रहीं और साथ ही 1998-99 के दौरान अजमेर से लोकसभा सांसद रहीं । प्रभा ठाकुर जी अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं । प्रभा ठाकुर जी ने कुछ हिंदी और राजस्थानी फिल्मों का निर्माण, निर्देशन और गायन भी किया है। 
प्रभा ठाकुर जी संसद सदस्य, राज्य सभा
10 अप्रैल 2002—9 अप्रैल 2008
10 अप्रैल 2008—9 अप्रैल 2014 तक रहीं ।

व्यक्तिगत विवरण
प्रभा ठाकुर जी का जन्म 10 सितंबर 1951, भुज , गुजरात में हुआ ।
राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,
जीवनसाथी  श्री राजेन ठाकुर जी
बच्चे -
श्री राहुल सिंह जी समेत 2 बेटे और 1 बेटी हैं
अभिभावक -
श्री देवी सिंह जी बारहठ, आरएएस (पिता)निवास स्थान जयपुर
शिक्षा -बी ० ए, एमए, पीएचडी

पेशा- कवयित्री, लेखक, समाज सेविका, और राजनीतिज्ञ

प्रारंभिक जीवन

गीतकार प्रभा ठाकुर जी
                      सुविख्यात कवयित्री एवं बॉलीवुड की टॉप गीतकारों में से एक डॉ. प्रभा ठाकुर का जन्म 10 सितम्बर 1951 को हुआ था। उन्होंने उदयपुर विश्वविद्यालय राजस्थान से पीएच डी की उपाधि प्राप्त की थी।

        डॉ. प्रभा ठाकुर जी  ने एक गीतकार के रूप में उन्होंने स न 1974 में फिल्म "अलबेली" के लिए 'तनिक तुम हमारी नजर पहचानो,
सन 1979 में फिल्म "आत्माराम" के लिए राहों पे मैं चलते चलते,
सन 1983 में फिल्म "घुँघरू" के लिए' तुम सलामत रहो, सन 1977 में फिल्म "दुनियादारी" में' प्यार करने से पहले जरुरी है ये,
'सन 1984 में फिल्म "पापी पेट का सवाल है" के लिए' मोसे चटनी पिसावे,
'तथा सन .  2006 में फिल्म "कच्ची सड़क" के लिए' ख्वाजा मेरे ख्वाजा ' और एक तुम से बात पूछूँ " जैसे गीतों की रचना की है।

      केवल गीत ही नहीं उन्होंने हिन्दी फीचर फिल्म "जय महालक्ष्मी माँ" का निर्माण किया था। हिन्दी कवी सम्मेलनों की ख्यातिप्राप्त कवियित्री डॉ. प्रभा ठाकुर जी की रचनाएँ देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं ।


प्रभा ठाकुर जी का जन्म 10 सितंबर 1951 को पिता श्री देवी सिंह जी बारहठ, (एक आरएएस अधिकारी )और मां श्रीमती सुशीला देवी जी के घर हुआ था, और वे अजमेर के किशनगढ़ के छोटा उदयपुर (या उदयपुर खुर्द) गांव से है ।

साहित्य और फ़िल्में

प्रभा ठाकुर जी एक प्रसिद्ध कवयित्री हैं और उनकी कविताएँ साप्ताहिक हिंदुस्तान , धर्मयुग और कादंबरी जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के साथ-साथ ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर भी नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं । वह विभिन्न हिंदी साहित्यिक सम्मेलनों और कवि संगोष्ठियों में भाग लेती हैं। उन्होंने कुछ हिंदी और राजस्थानी फिल्मों का निर्माण, निर्देशन, लेखन, संगीत रचना और गायन भी किया है।

फिल्में

गोरा हट जा निर्माता लघु फिल्म,
1997,बिनानी होवे तो ऐसी,निर्माता, संगीत, गीत राजस्थानी फीचर फिल्म,
1997, जय महालक्ष्मी मां, निर्देशक, संगीत, गीत, पटकथा, संवाद, कहानी हिंदी फीचर फिल्म,
2006,कच्ची सड़क  निर्माता, संगीत, गीत
बॉलीवुड फिल्म,

पार्श्वगायक

1984 पापी पेट का सवाल है, मोसै चटनी पिसावे हिंदी

1997,बिनानी होवे तो ऐसी, प्रीतम माने परनो तो राजस्थानी

बोल
1984 पापी पेट का सवाल है मौसे  चटनी पिसावे और
खिलौना बन के, हिन्दी
1974 अलबेली फ़िल्म- तनिक तुम हमरी नजर पहचानो,

1979 आत्माराम - राहों पे मैं चलते चलते,

1977दुनियादारी-
प्यार करने से पहले जरूरी है ये,
1983 घुंघरू -  तुम सलामत रहो, तोहफा कुबूल है,
1997 बिनानी होवे तो ऐसी - पतंग उड़ रे छोरा पतंग उड़ा,
2006 कच्ची सड़क -
ख्वाजा मेरे ख्वाजा, हमगामा हंगामा,
एक तुमसे बात, एक तुम से बात पूछूं,एक तुम से बात पूछूं आदि II

पुस्तकें

बौराया मन (कविता संग्रह) (1982)

आखर आखर (काव्य संग्रह) (1990)

देहरी का मन (काव्य संग्रह) 
आईएसबीएन  978-81-267-2532-8 (2013)

संपादित

चेतना के स्वर (कविता संग्रह) (1985)

जय हिन्द ।
जय भारत ॥
वन्दे मातरम ॥

 प्रस्तुति -निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत,8619666046
Email-chiranjikumawat54@gmail.com


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