दिल्ली की कुतुब मीनार
विदेशी आक्रांताओं ने भारत में जो भी निर्माण करवाया वो यहाँ के मंदिर, गढ किले महलों को तोडकर ही करवाया था । 27 किला को तोड़कर बनायी गयी थी दिल्ली की कुतुब मीनार ।
कुतुब मीनार का निर्माण काल लगभग 1192 का है ये मीनार पास के 27 किला को तोड़कर और दिल्ली विजय के उपलक्ष्य में 27 किले की सामग्री और मलबे से बनायी गयी थी । दिल्ली के महरौली स्थित ये कुतुब मीनार विदेशी आक्रांता, लुटेरे, अत्याचारी, बलात्कारी, हरामी, कुतुबद्दीन ऐबक और उसके उत्तराधिकारी शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने 1200 ईस्वी में करवाया था ।
दिल्ली की कुतुब मीनार के कॉम्प्लेक्स में शम्सुद्दीन इल्तुतमिश का मकबरा मौजूद है, जिसे बेहद खूबसूरती से बनाया गया है। शम्सुद्दीन इल्तुतमिश कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी और दामाद था , जिन्हें गुलामों का गुलाम भी कहा जाता है । क्योंकि यह शम्सुदीन इल्तुतमिश, कुतुबुद्दीन ऐबक का गुलाम था । और कुतुबदीन ऐबक, आक्रांता, लुटेरे, अत्याचारी और हरामी महमूद गोरी का गुलाम था।
इन विदेशी आक्रांताओं, लुटेरे, अत्याचारी और बलात्कारियों का इतिहास रहा है कि इन्होंने भारत जो सोने की चिड़िया था उसे जमकर लुटा, जमकर अमानवीय अत्याचार और बलात्कार किया, यहाँ की सांस्कृतिक विरासत को तहस नहस किया और यहाँ के लोगों को मार मार कर मुस्लिम धर्म कबूल करने के लिए मजबूर कर दिया गया था।
दिल्ली के महरौली स्थित इलाक़े में क़ुतुब मीनार परिसर में मौजूद क़ुतुब मीनार और क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, भारत में आक्रांता, लुटेरे अत्याचारी मुस्लिम सुल्तानों द्वारा निर्मित शुरुआती इमारतों में से हैं । सर्व विदित है और साक्ष्य मौजूद है कि कुतुब मीनार और उससे सटी क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के निर्माण में वहाँ मौजूद दर्जनों हिन्दू और जैन मंदिरों के स्तंभों और पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था ।
क़ुतुब मीनार के प्रवेश द्वार पर एक शिलालेख में लिखा भी है कि ये मस्जिद वहाँ और उससे बनाई गई है, जहाँ 27 हिंदू और जैन मंदिरों का मलबा था ।
इस मस्जिद में सदियों पुराने मंदिरों का भी एक बड़ा हिस्सा शामिल है। देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और मंदिर की वास्तुकला अभी भी आंगन के चारों ओर के खंभों और दीवारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है ।
कई जाने-माने इतिहासकारों प्रोफ़ेसरों ने कई बार कहा है, कि "इसमें कोई शक़ नहीं है कि ये कई पुराने मंदिरों का हिस्सा हैं। लेकिन जिन मंदिरों को तोड़ा गया था, ये वहीं थे या आस-पास कहीं थे, इस पर चर्चा होती रही है। ज़ाहिर सी बात है और यह भी हो सकता है कि 25 या 27 मंदिर एक जगह तो नहीं रहे होंगे. इसलिए कई मंदिरों, गढ़ किलों को तोड़कर इन स्तंभों को इधर-उधर से एकत्र करके यहाँ लाया गया होगा."
'क़ुतुब मीनार एंड इट्स मॉन्यूमेंट्स' के शीर्षक से लिखी गई क़िताब के लेखक और इतिहासकार बीएम पांडे ने बीबीसी से कहा था, ''जो मूल मंदिर थे वो यहीं थे. अगर आप मस्जिद के पूर्व की ओर से प्रवेश करते हैं, तो वहाँ जो स्ट्रक्चर है, वो असल स्ट्रक्चर है. मुझे लगता है कि असल मंदिर यहीं थे. कुछ इधर-उधर भी रहे होंगे, जहाँ से उन्होंने स्तंभ और पत्थर के अन्य टुकड़े लाकर उनका इस्तेमाल किया.''
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कुतुब मीनार दिल्ली में स्थित है। इसका निर्माण 1199 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारंभ किया तथा 1230–31 में इल्लतुतमिश ने पूरा करवाया । कुतुब मीनार का नाम सूफी संत कुत्बुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर पड़ा । कुतुब मीनार का निर्माण मुअज्जिन की अज़ान देने के लिए किया गया था लेकिन बाद में इसे विजय स्मारक (कन्नौज विजय) के रूप में जाना गया ।
कुतुब मीनार एक पांच मंजिला गोलाकार इमारत है जो नीचे से ऊपर की ओर पतली होती जाती है । इसकी ऊंचाई 242 फीट (72.5 मीटर) है और इसके बाहरी भाग पर अरबी व फारसी में लेख अंकित है । इसका निर्माण पूर्णतया "लाल बलुआ पत्थर "से हुआ है। इसके छज्जों के निर्माण में प्रयुक्त 'अवरोही टोडा "(stalactite bracketing) की तकनीक विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।
ऐबक ने कुतुब मीनार की सिर्फ एक ही मंजिल बनवायी थी । इल्लतुतमिश ने इसकी दूसरी ,तीसरी और चौथी मंजिल बनवा कर पूर्ण किया । परन्तु फिरोज़ तुगलक के समय में बिजली गिरने से यह क्षतिग्रस्त हो गई जिसका उसने जीर्णोद्धार करवाया और चौथी मंजिल के स्थान पर दो मंजिल बनवायी जिससे कुल मिलाकर पांच मंजिल हो गई ।
सच को कभी झुठलाया नहीं जा सकता । सच को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है पर हमेशा के लिए नहीं ।
जो भी हो ये सच है
के के मोहम्मद ने दावा किया कि दिल्ली में कुतुब मीनार परिसर में बनी मस्जिद 27 हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी। इसका स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कुतुब मीनार परिसर में बनी मस्जिद विष्णु मंदिर को तोड़ कर बनी है, इसके साफ सबूत हैं। मगर कुतुब मीनार अलग इमारत है और ऐसी मीनारें दूसरी जगह पर भी बनी हैं।
जय हिन्द
जय भारत
वन्दे मातरम् ॥
प्रस्तुति -
निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत,8619666046
Email - chiranjikumawat54@gmail.com
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