इतिहास से, भारतीय इतिहास का एक भयानक दुःखद प्रसंग...
इतिहास से-
भारतीय इतिहास का एक भयानक दुःखद प्रसंग ( राजस्थान के अत्यधिक वीर और रणबांकुरे परंतु कुछ अव्यावहारिक राजपूतों की आत्मघाती भूलें )
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को, अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले मेवाड़ के वीर महाराणा प्रताप और विदेशी लुटेरे, अत्याचारी, आक्रांता, विधर्मी मुगल, हरामी अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था। विदेशी लुटेरे अकबर की सेना का नेतृत्व आमेर के राजा मान सिंह प्रथम ने किया था । जबकि इस युद्ध में वीर महाराणा प्रताप को मुख्य रूप से कई देशभक्त राजाओं और भील जनजाति का सहयोग मिला था।
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 ई. को खमनोर एवं बलीचा गांव के मध्य तंग पहाड़ी दर्रे से आरम्भ होकर खमनोर गांव के किनारे बनास नदी के सहारे मोलेला तक कुछ घंटों तक चला था। युद्ध में निर्णायक विजय किसी को भी हासिल नहीं हो सकी थी।
अपनी मातृभूमि की रथार्थ स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने वाले वीर महाराणा प्रताप के पास लगभग 3,000-4,000 राजपूत और भील योद्धा थे। जबकि आमेर के राजा मान सिंह प्रथम के नेतृत्व में लुटेरी, विदेशी, विधर्मी हरामी मुगल सेना ने लगभग 20,000 सैनिकों को युद्ध में उतारा था ।
इतिहास गवाह है ।
बिल्कुल प्राचीन काल की तरह ही आज भी देश में दोनों तरफ से हिन्दू ही हिन्दू से लड़ रहा है। एक ओर जहाँ देशभक्त हिन्दू है तो दूसरी ओर कुछ जयचंद, गद्दार और वर्णशंकर किस्म के स्वार्थी हिन्दू । सभी हिन्दू इस बात का अवश्य अवश्य ही गहनता से विचार करें।
हल्दीघाटी युद्ध के समय की एक सच्ची और ऐतिहासिक घटना है -
एक विदेशी लुटेरे, अत्याचारी, आक्रांता, विधर्मी, दुराचारी अकबर के दरबार में एक कट्टरपंथी सुन्नी मुस्लिम अब्दअल ( अब्दूल) कादिर बदायूंनी था। उसने हल्दीघाटी के युद्ध को देखा था, जिसमें वह स्वयं भी सम्मिलित था। इसका वर्णन उसने अपनी पुस्तक "मुंतखाब उल वारीख" में किया है। जो कि मूल पुस्तक अरबी में है, जिसका 18 वीं सदी में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया।
अब यहाँ यह बात भारतीय सनातन हिन्दूओं के लिए विशेष सोचने, समझने और गौर करने वाली है ।
स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षार्थ लड़े गये हल्दीघाटी युद्ध में दोनों तरफ की सेनाओं में 90% राजपूत ही लड़ रहे थे। विदेशी, लुटेरे, विधर्मी, आक्रांता हरामी मुगल अकबर की तरफ से सेनापति मानसिंह और राजा लूणकरण थे तो दूसरी तरफ स्वयं वीर महाराणा प्रताप और अन्य जांबाज राजपूत राजा थे। दोनों तरफ की सेनाओं में वीर राजपूतों ने केसरिया साफे पहन रखे थे।
इसको देखकर विदेशी लुटेरे, आक्रांता, विधर्मी मुगल अकबर का एक सेनापति अबुल फजल इब्न मुबारक असमंजस में पड़ गया कि कौन राजपूत हमारी तरफ से लड़ रहा है और कौन शत्रु की तरफ से?
फिर विधर्मी लुटेरी मुगल सेना के सेनापति अबुल फजल इब्न मुबारक ने अब्द अल (अब्दूल) कादिर से पूछा कि दोनों तरफ की सेनाओं के वीर राजपूत केसरिया साफा पहने हैं, तो मैं कैसे पहचान करूं कि कौन सा राजा अपनी तरफ से लड़ रहा है और कौनसा शत्रु की तरफ से है?
तब विधर्मी, मुगल,अब्दअल ( अब्दूल) कादिर ने विधर्मी मुगल सेनापति अबुल फजल इब्न मुबारक से कहा- "तुम तो बस अपना तीर और अपना फरसा चलाते रहो, अपना भाला फेंकते रहो, मरने वाले दोनों तरफ से "काफिर" और "काफिर " ही होंगे!
चाहे ये हमारी सेना की तरफ के मरे या शत्रु सेना की तरफ के । किधर भी तीर चलाओ, किधर भी फरसा चलाओ,. चाहे किधर भी भाला फेंको, किसी को भी मारो आखिर तो जीत "इस्लाम" की ही होगी।
अब्दुल कादिर ने सेनापति अबुल फजल इब्न मुबारक से फिर कहा - अगर हम युद्ध में विजय हो सके तो ठीक है और अगर युद्ध में नहीं भी जीते, तो कम से कम खुदा से यह तो कह सकेंगे कि हमने हिन्दुस्तान से बहुत सारे काफिरों को चुन चुनकर मारा है !
यह है विधर्मी मुगलों का असली सच और ये है इनकी असली औकात ।
विदेशी लुटेरे, विधर्मी मुगल ना कभी किसी के हुये और ना कभी किसी के होंगे ।
काश । कि हम महामूर्ख बने भारतीय सनातन हिन्दू कभी इस इतिहास को भी पढ़ते और इससे कुछ सीख लेते! कि इन हरामी विदेशी लुटेरे मुगलों का असली मकसद क्या है ? इनका असली मकसद हिन्दुओं को आपस में लड़ाना, और काफिरों (हिन्दुओं ) का मौका लगते ही नरसंहार करके, जन्नत पाना है । जगवा ए हिन्द करना है ।
जो अपने इतिहास से नहीं सीखते, जो इतिहास से सबक नहीं लेते ऐसे लोग हों या देश एक दिन स्वयं ही खत्म हो जाता है ।
भारतीय सनातन हिन्दुओं की स्थिति आज भी बिल्कुल वैसी ही है जैसी हल्दीघाटी के युद्ध के समय थी । आज भी कोई ज्यादा और बड़ा अन्तर नहीं पड़ा है इसलिये इस पर बस थोड़ा सा विचार जरूर कीजियेगा! कोई सनातन हिन्दू जातियों में न बंटें, एक होकर और संगठित होकर रहें । पहले हम सनातन हिन्दू हैं । हम सभी भारतीय हैं । भारत युगों युगों से सनातन हिन्दू राष्ट्र था, हिन्दू राष्ट्र है और हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा ।.
जय हिन्द ।
जय भारत ॥
वन्दे मातरम् ॥
प्रस्तुति - निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत, 8619666046
Email- chiranjikumawat54@gmail.com
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