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धरती पर अमृत है तिल का तेल

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धरती पर अमृत है तिल का तेल  धरती पर अमृत है तिल का तेल यदि इस धरती पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम सबसे पहले आएगा लेकिन यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में शुद्ध रूप से उपलब्ध नहीं है । और ना ही हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता है ।  क्योंकि हमारे देश की नई और युवा पीढ़ी तो टी वी के विज्ञापन देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है । और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला बेकार का तरल चिकना पदार्थ जिसे वह शुद्ध रिफाइंड तेल कह कर बेचते हैं लेना और खाना ही बंद कर देंगे  तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर कर निकल जाता  है प्रयोग करके देखें....  आप पर्वत का एक  पत्थर लिजिए और उसमें कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...  लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में त...

स्वतंत्रता सेनानी, सदस्य - भारतीय संविधान सभा, पद्मश्री डॉ. रत्नप्पा भरमप्पा कुम्हार

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डॉ रत्नाप्पा भरमप्पा जी कुम्हार , (1909 - 1998 ) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जो भारतीय  संविधान सभा के सदस्य तथा उसके सचिव चुने गए थे। उन्हें देशभक्त डॉ रत्नप्पा जी कुम्हार के नाम से भी जाना जाता है। वह श्री भीमराव जी अम्बेडकर के साथ भारत के संविधान के अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों में से एक थे।   डॉ . रत्नप्पा जी कुम्हार, स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय संविधान सभा के सदस्य, पूर्व सांसद, महाराष्ट्र सरकार के पूर्व गृह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष थे। भारत सरकार ने उनके सामाजिक कार्य के लिए 1985 में उन्हें पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित भी किया गया था। देशभक्त, पद्मश्री डॉ. रत्नप्पा जी कुम्हार भारतीय संविधान सभा के एक सदस्य थे। वह एक समाज सुधारक और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने विशेष रूप से पिछड़े और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए काम किया था । संविधान निर्माण के दौरान, उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों के लिए अपनी आवाज पुरजोर तरीके से उठ...