"शोमैन ऑफ बॉलीवुड " अभिनेता निर्माता श्री राजकपूर जी की 100 वीं जयंती पर सादर नमन । विशेष लेख...
14 दिसंबर2024 को श्री राज कपूर जी की 100वीं जयंती है। शोमैन ऑफ बॉलीवुड श्री राजकपूर जी ।
वे आज की पीढ़ी के लिए भले ही अभिनेता रणबीर कपूर के दादा जी हों लेकिन उन्हें एक शोमैन की तरह ही जाना जाता था। आइए आपको बताते हैं उनके जीवन की कुछ दिलचस्प बातों को।
श्री राजकपूर जी , भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक थे । श्री राजकपूर जी को 'शोमैन ऑफ बॉलीवुड' के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशावर, ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका पूरा नाम रणबीर राज कपूर था। वे प्रसिद्ध अभिनेता श्री पृथ्वीराज जी कपूर के बेटे और कपूर परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य थे, जिसने भारतीय फिल्म उद्योग में अपना बड़ा योगदान दिया।
प्रारंभिक जीवन:
श्री राज कपूर जी का बचपन अभिनय और थिएटर के माहौल में बीता।
उन्होंने अपने पिता श्री पृथ्वीराज जी कपूर से प्रेरणा ली और बचपन में ही फिल्मों में रुचि दिखानी शुरू कर दी। उन्होंने 1935 में फिल्म 'इंकलाब' में एक छोटी भूमिका निभाकर अभिनय की शुरुआत की।
फिल्मी कैरियर:
श्री राज कपूर जी ने 1948 में महज 24 साल की उम्र में अपना प्रोडक्शन हाउस आर.के. फिल्म्स की स्थापना की और अपने निर्देशन की पहली फिल्म 'आग' बनाई।
हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन उन्होंने अपने जुनून और रचनात्मकता से फिल्मी दुनियाँ में अपनी पहचान बनानी शुरू की।
1949 में आई उनकी फिल्म 'बरसात' ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई।
इसके बाद श्री राज कपूर जी ने एक के बाद एक शानदार फिल्में दीं, जिनमें 'आवारा' (1951), '
श्री 420' (1955),
'जिस देश में गंगा बहती है' (1960), '
मेरा नाम जोकर' (1970),
और 'बॉबी' (1973) शामिल हैं।
उनकी फिल्मों में समाज, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण होता था।
सिनेमा में योगदान:
श्री राज कपूर जी को एक ऐसे फिल्मकार के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने भारतीय समाज की वास्तविकताओं को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी फिल्मों में संगीत का भी विशेष स्थान होता था। श्री शंकर-जयकिशन जी, श्री हसरत जयपुरी जी और श्री शैलेंद्र जी जैसे प्रतिभाशाली कलाकार उनके साथ काम करते थे।
श्री राजकपूर जी की फिल्मों के किरदार अक्सर गरीब लेकिन ईमानदार व्यक्ति होते थे, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते थे। फिल्म 'आवारा' में उनका किरदार और गीत "आवारा हूं" ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई।
व्यक्तिगत जीवन:
श्री राज कपूर जी का विवाह 1946 में कृष्णा मल्होत्रा जी से हुआ था। उनके पांच बच्चे हैं - श्री रणधीर कपूर जी, श्री ऋषि कपूर जी, श्री राजीव कपूर जी, रीमा जैन जी और रितु नंदा जी।
पुरस्कार और सम्मान:
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार ( सन् 1987) :
भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए। श्री राजकपूर जी को सन् 1987 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।
हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में देने के लिए श्री राजकपूर जी को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
और 11 फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
श्री राजकपूर जी की फिल्में जैसे 'आवारा' और 'बरसात' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता हासिल की थी।
भारतीय सिनेमा के 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' यानी श्री राज कपूर जी को भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे महान और सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्माता और अभिनेता माना जाता है। उन्हें समीक्षकों और अपने चाहने वालों से हमेशा सराहना ही मिली। फिल्मों के इतिहासकार और सिनेमा के शौकीन लोग उन्हें हिंदी सिनेमा का चार्ली चैपलिन भी कहते थे। उन्होंने अपनी फिल्मों से हमेशा दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में देने के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें फिल्मों के सबसे बड़े सम्मान 'दादासाहेब फाल्के' अवार्ड से भी नवाजा गया। कला में अपना योगदान देने के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म भूषण से भी अलंकृत किया। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में दर्जनों सुपरहिट फिल्में दीं। आज उनके 100 वें जन्मदिन पर हम आपको उनकी जिंदगी की कुछ सुपरहिट फिल्मों से रूबरू कराते हैं।
राजकपूर जी की दस यादगार फिल्में
1- नीलकमल (1947)
1947 में आई फिल्म 'नीलकमल' को श्री किदार शर्मा ने निर्देशित और निर्मित किया है। इस ड्रामा फिल्म में पहली बार राजकपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में दो राजकुमारियों को तख्तापलट के बाद उनके महल से बाहर निकाल दिया और एक अछूत परिवार के साथ रहने के लिए भेज दिया जाता है। दोनों बहनों को एक कलाकार से प्यार हो जाता है, जिसके कारण उनमें से एक आत्महत्या कर लेती है। इस ब्लैक एंड वाइट फिल्म में श्रीराजकपूर जी, मधुबाला जी और बेगम पारा जी मुख्य भूमिका में थे।
2- आग (1948)
साल 1948 में आई फिल्म 'आग' एक ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन और निर्माण श्री राजकपूर जी ने किया है। कहानी में केवल अपनी कानून की परीक्षा में असफल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसे अपने घर से बाहर निकाल दिया जाता है। वह अपने दोस्त राजन के पास आता है। केवल का एक स्टेज कलाकार बनने का सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए उसका दोस्त राजन केवल की पूरी मदद करता है। श्री राजकपूर जी ने इसी फिल्म से निर्माता और निर्देशकों की दुनिया में कदम रखा था । यह नरगिस जी के साथ श्री राजकपूर जी की पहली फिल्म थी। श्री राजकपूर जी और नरगिस जी के अलावा श्री प्रेमनाथ जी और कामिनी कौशल जी फिल्म में मुख्य भूमिका में थे।
3- आवारा (1951)
वर्ष 1951 की फिल्म 'आवारा' एक क्राइम ड्रामा फिल्म है। इसे श्री राजकपूर जी ने निर्देशित और निर्मित किया है। कहानी में राज उस व्यक्ति की हत्या करता है जो उसके माता-पिता के अलग होने के लिए जिम्मेदार था। फिर उसे मुकदमे में भेज दिया जाता है और जज का सामना करना पड़ता है। वह जज उसके बेगुनाह पिता हैं, जो अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश करते हैं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह फिल्म एक मील का पत्थर साबित हुई। इसकी ख्याति सोवियत संघ, पूर्वी एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिमी यूरोप तक फैली। इसका गाना 'आवारा हूं' सोवियत संघ, चीन, बुल्गारिया, तुर्की, अफगानिस्तान और रोमानिया तक हिट हुआ। इस फिल्म को 1953 में कांन्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्राइज के लिए भी नामित किया गया था। टाइम मैगजीन ने आवारा को 100 सबसे बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट में भी शामिल किया। फिल्म में श्री राजकपूर जी , नरगिस जी , श्री पृथ्वीराज कपूर जी और लीला चिटनीस जी मुख्य भूमिका में हैं।
4- बूट पॉलिश (1954)
बूट पोलिश एक ड्रामा फिल्म है। इसे श्री प्रकाश अरोरा जी ने निर्देशित और खुद श्री राजकपूर जी ने निर्मित किया है। कहानी में कमला अपनी बहन की मौत के बाद भाई-बहन बेलू और भोला को भीख मांगने के लिए मजबूर करती है। वे जीवित रहने के लिए जूते पॉलिश करना सीखते हैं और भीख मांगने से इंकार करते हैं, लेकिन उनकी किस्मत तब बदलती है जब वह अलग होते हैं। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। साथ ही कांन्स फिल्म फेस्टिवल में नामित भी किया गया। श्री राजकपूर जी, कुमारी नाज जी, श्री रतन कुमार जी और चाँद बुर्के जी की फिल्म में मुख्य भूमिका है।
5- श्री 420 (1955)
फिल्म 'श्री 420' एक क्राइम ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म को श्री राजकपूर जी ने निर्मित और निर्देशित किया है। फिल्म की कहानी में राज एक अनैतिक जीवन शैली का शिकार हो जाता है, जब एक अमीर व्यापारी सोनाचंद, उसे इसमें शामिल करता है। हालांकि, जब राज को सोनाचंद के भद्दे तरीके का पता चलता है, तो वह संशोधन करने का फैसला करता है। यह फिल्म साल 1955 की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म है। इसको बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड भी मिला। इसका गाना 'मेरा जूता है जापानी' आजाद भारत में एक देशभक्ति गाने का प्रतीक माना गया। फिल्म में श्री राजकपूर जी, नरगिस जी और नादिरा जी मुख्य भूमिका में हैं।
6- फिर सुबह होगी (1958)
1958 की फिल्म 'फिर सुबह होगी' एक ड्रामा फिल्म है। इसे शरी रमेश सैगल जी ने निर्मित और निर्देशित किया है। फिल्म की कहानी में सोनी को विवाहित हरबंसलाल से शादी करने से बचाने के लिए, राम एक साहूकार को लूटने जाता है, लेकिन वह उसे मार देता है। जैसे ही वह कानून से भागता है, एक निर्दोष व्यक्ति पकड़ा जाता है और उसे सजा सुनाई जाने वाली होती है। यह फिल्म एक उपन्यास 'क्राइम एंड पनिशमेंट' पर आधारित है। बेस्ट एक्टर के लिए श्री राजकपूर जी को इस फिल्म में फिल्मफेयर के लिए नामित किया गया। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट घोषित किया गया था। फिल्म में श्री राजकपूर, माला सिन्हा जी और रेहमान जी मुख्य किरदार में हैं।
7- अनाड़ी (1959)
अनाड़ी एक म्यूजिकल कॉमेडी फिल्म है। इसको श्री हृषिकेश जी मुखर्जी ने निर्देशित किया है। कहानी में राज, एक ईमानदार आदमी, खुद को मुसीबत में पाता है जब उस पर अपनी मकान मालकिन की हत्या का आरोप लगाया गया, जिसे जहर दिया गया था। हालांकि, वह कानून से बच जाता है और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत खोजने के लिए निकल पड़ता है। इस फिल्म का तमिल भी रीमेक किया गया। श्री राजकपूर जी को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। यह उन कुछ फिल्मों में से एक है जिसमें ललिता पवार जी ने सकारात्मक किरदार निभाया है। फिल्म के मुख्य किरदार श्री राजकपूर जी, नूतन जी, ललिता पवार जी और श्री मोतीलाल जी हैं।
8- जिस देश में गंगा बहती है (1960)
1960 की फिल्म 'जिस देश में गंगा बहती है' एक ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म के निर्माता श्री राजकपूर जी और निर्देशक श्री राधू करमाकर जी हैं। कहानी में राजू पुलिस को डाकुओं के एक ग्रुप के बारे में सूचित करता है, भले ही वह मुखिया की बेटी के साथ प्यार करता हो। पुलिस ने कबीले को मारने के लिए जाल बिछाया। आगे की कहानी यह डाकुओं को मरने और उसके प्यार को बचाने के आसपास घूमती है। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर हिट घोषित किया गया था। इस फिल्म को आठ फिल्मफेयर के लिए नामित किया गया था जिसमें से इसने चार जीते। फिल्म के मुख्य कलाकार पद्मिनी जी, श्री राजकपूर जी, और श्री प्राण जी हैं।
9- संगम (1964)
संगम 1964 की एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है। इसे श्री राजकपूर जी ने निर्देशित किया है। और मेहबूब स्टूडियो और फिल्मिस्तान स्टूडियो के साथ मिलकर निर्मित भी किया है। जब राधा सुन्दर को अस्वीकार कर देती है, तो सुन्दर राधा के लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए तैयार हो जाता है। वह अंततः उससे शादी करने का प्रबंधन करता है, लेकिन जब वह एक प्रेम पत्र लिखता है तो एक अचंभे में आ जाता है। यह फिल्म काफी हद तक 1939 की हॉलीवुड फिल्म 'गॉन विथ द विंड' से प्रेरित है। यह श्री राजकपूर जी की पहली रंगीन फिल्म है। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने अच्छा व्यापर किया। इस फिल्म को 11 फिल्मफेयर नामांकन मिले जिसमें से इसने चार पर कब्जा किया। साथ ही इस फिल्म ने छः बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोशिएशन अवार्ड भी जीते। फिल्म के मुख्य कलाकार श्री राजकपूर जी, श्री राजेंद्र कुमार जी और वैजन्तीमाला जी हैं।
10- मेरा नाम जोकर (1970)
फिल्म 'मेरा नाम जोकर' एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक श्री राजकपूर जी हैं। फिल्म की कहानी में राजू ने जीवन भर दिल के मामलों में कई बाधाओं और निराशाओं का सामना किया। लेकिन एक सर्कस में क्लोन के रूप में, वह अपने दर्शकों को अपने दुखों की कीमत पर हंसाने की कोशिश करता है। यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे लम्बी फिल्म है। संगम के बाद यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। कहते हैं ये फिल्म इनका ड्रीम प्रोजेक्ट थी। इसको बनने में छः साल लगे थे इसलिए इसका प्रचार खूब हुआ। शुरुआत में इस फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों ने नकार दिया था, जिसके बाद श्री राजकपूर जी पर आर्थिक संकट आन पड़ा था। फिल्मों के जानकार आज इस फिल्म को मास्टरपीस कहते हैं। इस फिल्म की अद्वितीयता को देखते हुए पांच फिल्मफेयर और तीन नेशनल अवार्ड से सुशोभित किया गया।
शेष भाग -2 में....
प्रस्तुति -निर्माता निर्देशक -चिरँजी कुमावत, 8619666046
Email-chiranjikumawat54@gmail.com
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