कच्ची घाणी (कोल्ड प्रेस्ड) तेल क्यों है रिफाइन्ड तेल की तुलना में बेहतर ?
कच्ची घाणी (कोल्ड प्रेस्ड)तेल क्यों है रिफाइन्ड तेल की तुलना में बेहतर ?
कच्ची घाणी (कोल्ड प्रेस्ड) ऑयल
दुनियाभर में इतने सारे तेल हैं कि कई बार आप भी कन्फ्यूज हो जाते होंगे कि किसका इस्तेमाल करें और किसका नहीं, कौन सा तेल आपकी सेहत स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर और फायदेमंद है?
वो सारे तेल जो हमारी सेहत और स्वास्थ्य के लिए अच्छे बेहतर और फायदेमंद माने जाते हैं वे सभी प्लांट-बेस्ड यानी पौधों से प्राप्त होने वाले तेल हैं । लिहाजा हमारे सामने सूरजमुखी के तेल से लेकर सरसों का तेल, जैतून का तेल, तिल का तेल, मूंगफली का तेल और सोयाबीन का तेल जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। तेल की बेहतर वैरायटी में पारम्परिक बैल कोल्हू जो अब बिजली से चलने के कारण कच्ची घानी यानी कोल्ड प्रेस्ड तेल को माना जाता है । कोल्ड प्रेस ऑयल को सदियों से खाना बनाने के लिए सबसे अच्छा , शुद्ध और बेहतर तेल माना जाता है ।
आपको बता दें कि भारत देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में सेहत और स्वास्थ्य के लिहाज से कच्ची घाणी (कोल्ड प्रेस्ड) ऑयल को काफी अच्छा और बेहतर माना जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। तो आखिर कोल्ड प्रेस्ड या कच्ची घानी तेल है क्या ? बाकी आधुनिक बड़ी तेल मिलों से बनाये गये रिफाइन्ड तेलों से यह तेल किस तरह से अलग है और कच्ची घानी तेल के फायदे और नुकसान क्या-क्या हैं, इस बारे में हम आपको इस लेख में बता रहे हैं
कच्ची घानी तेल के फायदे और नुकसान-
कच्ची घानी तेल क्या होता है ?
बड़ी मिलों में कैमीकल एवं हीट प्रोसेस करके बनता है
रिफाइन्ड तेल मिल
किसी भी बीज से तेल निकालने के लिए 2 तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें बड़े स्तर पर बड़ी मिलों में बल्क में उत्पादन करने के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध तरीका है- रासायनिक घोल का इस्तेमाल करके तेल का निचोड़ प्राप्त करना जिसके बाद इसे रासायनिक रूप से परिष्कृत (रिफाइंड) किया जाता है ताकि इसमें से अशुद्धियां निकल जाएं और इसमें पोषक तत्वों (फोर्टिफाइड तेल बनाने के लिए) को शामिल किया जा सके।
कोल्ड प्रेस्ड कच्ची घाणी ऑयल-
वहीं, दूसरी तरफ कोल्ड प्रेस्ड ऑयल या कच्ची घानी (कोल्हू जैसी मशीन में, जो लड़की, लोहा या स्टील की बनी होती है )तेल बनाने की प्रक्रिया में एक प्रेस जैसी मशीन जिसे (कोल्ड एक्सपेलर कहा जाता है ) में बीजों को डालकर दबाव के साथ अच्छी तरह से कूटा या दबाया जाता है ताकि बीज के पल्प या गूदे को तेल से अलग किया जा सके। हो सकता है कि कच्ची घानी तेल (जो यही शुद्ध और ऑरिजनल तेल होता है ) में कुछ अशुद्धियां रह जाएं (जो मुख्य रूप से पल्प का हिस्सा होता है) लेकिन इस तरह से बनने वाले तेल को प्राप्त करने के लिए उच्च गर्मी या केमिकल्स की जरूरत नहीं होती और यही मुख्य कारण है की जिस वजह से इसे बाकी तेलों की तुलना में अधिक फायदेमंद माना जाता है।
क्या कोल्ड प्रेस्ड तेल बाकी तेलों से बेहतर है ?
इंटरनैशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज में साल 2018 में प्रकाशित एक स्टडी में यह समझाया गया है कि कोल्ड प्रेस्ड ऑयल यानी कच्ची घानी तेल में पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं और इसका कारण ये है कि इस तेल को रिफांइड यानी परिष्कृत नहीं किया जाता है। चूंकि कोल्ड-प्रेसिंग प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की गर्मी या रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं होता है, लिहाजा कोल्ड प्रेस्ड ऑयल या कच्ची घानी तेल के घटक और चिकित्सा संबंधी फायदे अन्य तेलों की तुलना में काफी अधिक होते हैं।
कच्ची घानी तेल में एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स जैसे- टोकोफेरॉल्स, स्टेरॉल्स, स्टैनॉल्स, फॉस्फोलिपिड्स और फेनॉलिक कंपाउंड्स की सघनता काफी अधिक होती है। ज्यादातर कच्ची घानी तेल में पॉलिअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (पीयूएफए) भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इन तेलों को फिक्स्ड या स्टेबल (स्थिर) तेल भी कहते हैं क्योंकि रूम के तापमान पर यह तेल बदलता नहीं है। हालांकि, एंटीऑक्सिडेंट्स की मौजूदगी के कारण अक्सर कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल या कच्ची घानी तेल में ऑटो-ऑक्सिडेशन (रूम के सामान्य तापमान पर ऑक्सीजन की वजह से ऑक्सिडेशन होना) होने लगता है जिसकी वजह से अगर तेल को सही तरीके से संरक्षित करके न रखा जाए तो तेल की शेल्फ-लाइफ (तेल को स्टोर करके रखने और उपयोग होने की अवधि) कम हो जाती है और वह खराब होना शुरू हो जाता है।
कच्ची घानी कोल्ड प्रेस्ड तेल के फायदे -
इस बात के कई सबूत मौजूद हैं कि कोल्ड प्रेस्ड ऑयल या कच्ची घानी तेल सेहत और स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद और बेहतर होता है। हम आपको कच्ची घानी तेल के उन विभिन्न फायदों के बारे में बता रहे हैं जिसकी वजह से आप इस तेल को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहेंगे ।
इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए-
जैसा कि पहले ही बताया गया है कि कच्ची घानी तेल में पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक होती है खासकर एंटीऑक्सिडेंट्स की। लिहाजा इन पोषक तत्वों की अधिक मात्रा को प्राप्त करने से न सिर्फ इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है बल्कि फ्री रैडिकल्स की वजह से शरीर को होने वाले नुकसान से भी बचाता है।
हृदय स्वस्थ रहता है -
बहुत से लोगों के मन में इस बात की भी आशंका रहती है कि ज्यादातर तेल कोलेस्ट्रॉल के मामले में भारी और हानिकारक होते हैं लेकिन कच्ची घानी तेल में पीयूएफए यानी पॉलिअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है जो इसे हार्ट के लिए हेल्दी बनाता है। इसके अलावा कोल्ड प्रेस्ड ऑयल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड भी होता है जो आपके हृदय के लिए अच्छा माना जाता है।
ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है -
कुछ अध्ययनों में यह बात भी सामने आयी है कि कच्ची घानी तेल जैसे- वर्जिन और एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम भी कम हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि कच्ची घानी तेल, भोजन करने के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।
इन्फ्लेमेशन से लड़ने में मददगार-
चूंकि कच्ची घानी तेल एंटीऑक्सिडेंट्स और हेल्दी फैट से भरपूर होता है इसलिए अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि कच्ची घानी तेल इन्फ्लेमेशन लेवल को कम करने में भी मदद करता है। इसलिए यह जरूर याद रखें कि कोल्ड प्रेस्ड ऑयल केमिकल फ्री पौधों पर आधारित तेल का विकल्प है इसलिए इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
त्वचा के लिए फायदेमंद-
कच्ची घानी तेल स्थिर होते हैं, एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं और पूरी तरह से केमिकल फ्री यानी रसायन-मुक्त होते हैं। लिहाजा आपकी स्किन और सिर की त्वचा (स्कैल्प) के लिए भी यह तेल परफेक्ट है क्योंकि इस तेल को लगाने से न सिर्फ त्वचा और बालों को नमी मिलती है बल्कि एलर्जी, मुंहासे और चकत्ते दूर करने में भी मदद मिलती है।
रिफाइन्ड तेल बनने की प्रक्रिया
रिफाइन्ड तेल में मुख्यतः वनस्पति तेल को विभिन्न रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं से शुद्ध किया जाता है ताकि उसे ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सके और उसका रंग, स्वाद और गंध बेहतर हो। इसमें कुछ मुख्य प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं:
1. डिगमिंग (Degumming) - इसमें तेल से गोंद और अन्य अशुद्धियाँ हटाई जाती हैं।
2. न्यूट्रलाइज़ेशन (Neutralization) - इस प्रक्रिया में तेल से फ्री फैटी एसिड्स को हटाया जाता है ताकि वह अधिक स्थिर और उपयोग के लिए सुरक्षित हो सके।
3. ब्लीचिंग (Bleaching) - तेल से रंगद्रव्य और गंध हटाने के लिए यह प्रक्रिया की जाती है।
4. डिओडराइजेशन (Deodorization) - उच्च तापमान पर तेल की भाप से गुजराकर इसकी गंध को कम या हटाया जाता है।
5 प्रिज़र्वेटिव्स (Preservatives) - तेल की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए उसमें प्रिज़र्वेटिव्स या एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिलाए जा सकते हैं।
रिफाइन्ड तेल में विभिन्न रसायनिक तत्व और प्रक्रियाओं के कारण इसके प्राकृतिक पोषक तत्वों में कमी आ सकती है।
खाना पकाने के लिए आपको रिफाइंड तेल का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?
रिफाइन्ड तेल में आमतौर पर LDL (Low-Density Lipoprotein) यानी "खराब कोलेस्ट्रॉल" का स्तर अधिक होता है, जबकि HDL (High-Density Lipoprotein) यानी "अच्छा कोलेस्ट्रॉल" का स्तर कम होता है। रिफाइंडिंग की प्रक्रिया में तेल के प्राकृतिक गुण, जैसे कि एंटीऑक्सिडेंट्स और हेल्दी फैटी एसिड, कम हो जाते हैं, जिससे ये तेल हार्ट हेल्थ के लिए जहर बन जाते हैं।
रिफाइंड तेलों को आम तौर पर अत्यधिक गर्मी और रसायनों का उपयोग करके निकाला जाता है, जो प्रामाणिक पौधे के स्रोत में पाए जाने वाले कई प्राकृतिक पोषक तत्वों और स्वस्थ यौगिकों को नष्ट कर देते हैं। यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं कि आपको खाना पकाने के लिए रिफाइंड तेलों का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए ।
कम पोषण मूल्य,
रासायनिक अवशेष
कम स्वादिष्ट
सूजन को बढ़ावा दे सकता है
कम पोषण मूल्य-
रिफाइंड तेलों की शेल्फ लाइफ लंबी हो सकती है और उनका स्मोक पॉइंट भी अधिक होता है, लेकिन उनमें प्राकृतिक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट की कमी होती है जो अपरिष्कृत संस्करणों में मौजूद होते हैं। इसके परिणामस्वरूप कम पौष्टिक अंतिम उत्पाद बन सकता है।
रासायनिक अवशेष-
रिफाइनिंग प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने वाले रासायनिक सॉल्वैंट्स तेल में रसायनों के निशान छोड़ सकते हैं। समय के साथ, ये अवशेष शरीर में जमा हो सकते हैं और आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
कम स्वादिष्ट-
रिफाइंड तेलों में अक्सर अपरिष्कृत तेलों की तुलना में ज़्यादा तटस्थ स्वाद होता है। इसलिए, अगर आप अपने व्यंजन में कोई खास स्वाद चाहते हैं तो यह एक कमी हो सकती है।
सूजन को बढ़ावा दे सकता है-
कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि परिष्कृत तेलों का सेवन शरीर में सूजन को उत्तेजित कर सकता है, जो हृदय रोग, मधुमेह और गठिया जैसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान कर सकता है।
इसलिए, खाना पकाने के लिए रिफाइंड तेलों का उपयोग करने से अंतिम उत्पाद कम स्वस्थ और स्वादिष्ट हो सकता है और रासायनिक अवशेषों और सूजन को बढ़ावा देने वाले संयोजनों के संपर्क में आने की संभावना हो सकती है। इसलिए रिफाइंड तेल सेहत और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है ।
अपरिष्कृत या कोल्ड-प्रेस्ड तेलों का चयन करना एक स्वस्थ और अधिक स्वादिष्ट विकल्प हो सकता है।
रिफाइन्ड तेल में LDL (Low-Density Lipoprotein) का स्तर अधिक होता है, जबकि HDL (High-Density Lipoprotein) का स्तर कम होता है। रिफाइनिंग प्रक्रिया में तेल में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व और अच्छे वसा (HDL) को कम कर दिया जाता है और इसमें ट्रांस फैट्स या संतृप्त वसा के साथ-साथ ऑक्सीडेटिव तत्व बढ़ जाते हैं, जो LDL को बढ़ाने में योगदान करते हैं। उच्च LDL स्तर हृदय रोगों के जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है । रिफाइन्ड तेल सेहत और स्वास्थ्य के लिए किसी जहर से कम नहीं हैं ।
सरसों के तेल में कच्ची घानी का क्या मतलब होता है?
कच्ची घानी तेल तिलहनों को बिना तापमान के बिना गर्म किये तैयार किया जाता है। बिना तापमान के तेल निकलने के कारण तेल में मौजूद पौषक तत्व बने रहते हैं और यह शरीर सेहत और स्वास्थ्य के लिए बहुत फ़ायदेमंद भी होते हैं।
कोल्ड प्रेस्ड कच्ची घानी तेल, बीजों से तेल निकालने की एक पारंपरिक प्रक्रिया है । इसमें बीजों को बिना तापमान दिये कुचला जाता है, जिससे तेल में सभी प्राकृतिक गुण, एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और ज़रूरी तेल बरकरार रहते हैं। कच्ची घानी तेल को अंग्रेज़ी में 'कोल्ड प्रेस ऑयल' भी कहते हैं । इसे बनाने के लिए, बीजों को पहले धोया जाता है और फिर पारंपरिक तरीके से, लकड़ी के कोल्हू, लोहा या स्टील की बनी घाणी या एक्सपेलर में बिना गर्म किये कुचला जाता है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के रसायनों या विलायकों का कोई भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है ।
कच्ची घानी तेल के बारे में कुछ और बातेंः
कच्ची घानी तेल, सरसों, तिल, मूंगफली, राई सोयाबीन जैसे तिलहनों से बनता है ।
कच्ची घानी तेल में गंध और चिपचिपाहट ज़्यादा होती है, जिससे यह बहुत फ़ायदेमंद होता है ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद पोषक तत्व शरीर सेहत और स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होते हैं ।
कच्ची घानी तेल को खाना बनाने के लिए सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है ।
कच्ची घानी तेल को शरीर पर मालिश करने से त्रिदोष का नाश होता है ।
कच्ची घानी तेल में एलिल आइसोथियोसाइनेट नामक एक घटक होता है, जो बैक्टीरिया और फ़ंगल स्कैल्प संक्रमण को रोकता है ।
कच्ची घानी ( कॉल्ड प्रेस )तेल के और भी कई फ़ायदे हैं:
कच्ची घानी तेल में मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट, प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं और बीमारियों से बचाव करते हैं।
इसमें मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
कच्ची घानी तेल में मौजूद ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड, हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण, इन्फ़्लेमेशन से लड़ने में मदद करते हैं ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद विटामिन ई, त्वचा को नरम और कोमल बनाता है ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद बीटा-कैरोटीन, बालों के विकास को बढ़ावा देता है ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, गठिया के कारण होने वाली जकड़न और दर्द को कम करता है ।
कच्ची घानी तेल में मौजूद अल्फ़ा-टोकोफ़ेरॉल में मौजूद विटामिन ई, मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है ।
कच्ची घानी तेल का स्मोक पॉइंट ज़्यादा होता है, इसलिए इसे तलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है ।
प्रस्तुति - निर्माता निर्देशक - चिरँजी कुमावत, 8619666046
Email-chiranjikumawat54@gmail.com
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